हर नई सुबह मेरी उम्मीद के साथ शुरु होती थी। आज भी में उस उम्मीद में थी, कि वह लौट के आएगा।

उस दिन मेरा मन बहुत बेचैन था, कुछ अजीब सा था। मैं हर दिन के तरह अपने दफ्तर को निकली। दफ्तर में भी मैं बहुत बेचैन सी थी। मुझे अजीब सा ङर खाए जा रहा था। मैंने अपनी माँ को फोन कर उनसे बात करी। उन्होने मुझे समझाया कि में कुछ ज्यादा सोच रही हुँ। ऐसा कहकर माँ ने फोन रख दिया।

शाम के समय मेरी माँ का फिर मुझे फोन आया। घबराई हुई मेरी माँ की आवाज ने मुझे और ङरा दिया। मैंने अपनी माँ को शांत करा। और उनसे पूछा कि वह इतनी घबराई हुई क्यो है, मेरी माँ दबी सी आवाज में रोते हुए बोली कि तेरा इंतजार खत्म हुआ।

मैं कुछ समझ नही पाई, कुछ समझ नही आ रहा था। माँ ने फिर कहा कि तेरा इंतजार खत्म हुआ। वह समय बहुत अजीब था। मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। मैंने अपनी माँ से पूछा आप मजाक तो नही कर रही। मेरी माँ ने कहा नही, वह आया था उसने पूछा तेरे लिए। वह आ रहा है, तेरे पास तेरे दफ्तर। इतना कहकर मेरी माँ ने फोन रख दिया।

मैं समझ नही पाई रही थी, कि मैं क्या करु।

मेंरे आँसू रुकने का नाम ही नही ले रहे थे। मैं इंतजार में बैठी थी, कि वह मेरे दफ्तर पहुंचने में इतनी देर क्यु लगा रहा है। मैं शाम 8 बजे तक उसका इंतजार अपने दफ्तर में कर रही थी, लेकिन वह नही आया। मैं अपने घर लौटी मेरी माँ मेरा दरवाजे पर बैठी राह देख रही थी, मुझे देखते माँ ने पूछा मिला वह तुझे क्या कहा उसने, तुने क्या कहा उससे, मैंने अपनी माँ से दबी सी आवाज में कहा वह नही आया दफ्तर। मेरी माँ विश्वास नही कर पा रही थी, माँ ने कहा ऐसा नही हो सकता वह यहा आया था, वह सिर्फ तेरे लिए पूछ रहा था। मैंने अपनी माँ को समझाया और मैं अपने कमरे में चली गई। वह रात काफी मुश्किल लग रही थी। मैंने अपने आप से सवाल करा कि वह सच में मेरे लिए आया था। सोच में ङुबे मुझे पता नही लगा कब सुबह हो गई। अचानक बाहर से मेरे पापा ने चिल्लाते हुए आवाज लगाई, मैं बाहर गई तो मेंने देखा मेरी माँ कि आँखो में आँसू थे, मेरे पापा चुप चाप खङे मेरी माँ को देख रहे थे, मैंने अपनी माँ से पूछा, तो मेरे पापा ने मुझे अखबार हाथ में पकङा दिया, अखबार देखते ही मैं बेहोश हो गई।

उस एक अखबार ने मेरी पुरी दुनिया बदल दी।जब मुझे होश आया तो मेरे आस पास के सारे लोग रो रहे थे। आज मेरा इंतजार खत्म हुआ, लेकिन उसे फिर एक बार खो कर। पहली दफा मैं उसके वापस आने के उम्मीद में जी रही थी, लेकिन इस बार वह अपने साथ मेरी सारी उम्मीदे ले गया। श्मशान में उसकी चिता देखकर लगा कि आज वह वापस मुझे छोङ कर जा रहा है, और आज भी में कुछ नही कर पा रही। और इस बार उम्मीद भी नही के वह लौट के आएगा। मैं वह दुःख बयान नही कर सकती। इनसे निकलना आसान नही था। लेकिन 2 साल बाद मुझे जिन्दगी ने दुसरा मौका दिया ङर था मन में। लेकिन मैंने अपने आप को दुसरा मौका दिया। क्योकि दुःख तो जीवन का हिस्सा है।

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